बुधवार, जून 26, 2013

वो पल..



मेरी अब तक की सारी ज़िंदगी इंतज़ार में ही बीती है..। इंतज़ार कुछ और ही हो जाने का..। हमेशा ऐसा लगा है बस वो कुछ और हो जाने से दहलीज़ भर का फासला है..। मन कहता रहा, बस एक कदम और... स्कूल का सारा वक्त बिताया अपने कालेज संस्करण के इंतज़ार में..। कालेज पहुंचा तो वो यूनिवर्सिटी का इंटलेक्चवेल हमेशा नज़रों के आगे नाचता रहा..। ज़्यादा सयाना, मज़बूत और व्यवस्थित..। ज़िंदगी के करीब दो दशक सिर्फ इंतज़ार मे बीते हैं..। उस एक लम्हे के इंतज़ार में..जिसके बाद जिंदगी असल में शुरु होगी..। और इसी इंतज़ार की परिणति मैं हूं..। रोज़ दर रोज़ ज़िंदगी फिसल रही है और मैं इसके आगाज़ का इंतज़ार कर रहा हूं..। किसी एक लम्हे, किसी एक शख्स का इंतज़ार..या फिर वो कोई एक जादुई घटना..जिसके बाद मेरी ज़िंदगी सही मायनों में डग भरना शुरु करेगी..। "The Big Moment" वाली फिल्मों का कायल रहा हूं..। ऐसे मैच, नाटक..आम इंसानों की ज़िंदगी में भी ऐेसे लम्हे..। कहानियां जिनमें वो एक पल समय के विभाजन का बिंदू बन जाए..। जिसके इकबाल के आगे अतीत और भविष्य के सब सच सूरत बदलने पर मजबूर हो जाएं..। अक्सर फिल्मों या किताबों में मिलने वाला ऐेसा एक लम्हा जो सबकुछ बदल देगा..जो इस प्रतीक्षा का क्लाइमेक्स होगा..सदा से मेरी चाहत रहा है..। ऐसी फिल्मों, ऐसे खेल के मुकाबलों पर चमत्कृत होता हूं..क्योंकि खुद भी उसी चमत्कारी क्षण के इंतज़ार में हूं..। ज़िंदगी ने जब छुआ रोमांच, उत्सव, आश्चर्य के लम्हों में छुआ..। लेकिन मैं तो सिर्फ दफ्तर जाता हूं और लौटकर घर आता हूं..। फिल्मों या असल जीवन के नायक के भव्य सच की रोशनी में कितनी साधारण दिनचर्या..। JOHN LENNON का कहा कही पढ़ा, “Life is what happens when you’re busy making other plans.”..। But for me, life is what was happening while I was busy waiting for my big moment.। मै उस पल के लिए हमेशा तैयार खड़ा रहा..। हमेशा माना कि वही लम्हा ऐसी नाव बन जाएगा जो जीवन सागर के पार लगा दे..।
लेकिन अफसोस वो 'जादुई पल' महज़ एक शहरी मिथक है..। एक मायने में कुछ लोगो को मिलता है; REALITY SHOWS के विजेता, कंडक्टर से सिनेमा स्टार बन जाने वाले लोग..। मगर इंडियन आयडल या कोई स्टार भी जो ज़िंदगी जी रहा है..वो सिर्फ उस एक लम्हे से नहीं बनी है..। ज़िंदगी तो खरबों खरबों पलों का जोड़ है..। छोटे-छोटे पल और उनमें लिए जाने वाले फैसले..। वक्त की निश्छल नदी के तल पर चमकते अनगिनत कंकर..! बहुत वक्त और कोशिश चाहिए उन्हें पिरोने के लिए..। फिल्मों का पर्दा कितना भव्य है..और इन कंकरों का सच कितना सादा..। अब लगता है कि यही तो नहीं है वो पल? मेरे इंतज़ार का हासिल, वो रोमांच, ऐसा अनुभव जो बैकग्राउंड में यश चोपड़ा की फिल्म के गीत के लायक हो..। , घर, गलियों बिस्तरों, डिनर टेबलों, सपनों, प्रार्थनाओं, और कशमकशों में बीतता पल..। कहीं ये तो नहीं है वो पल..?

1 टिप्पणी:

  1. duniya ka har ensan us ek satya ki khoj me hai.... aur sbi us shanti ko pane ke liye apne apne tarike se kaam kr rhe hain,,,, aur sbko haq bhi hai.... hr dharm me kyi cheje bhut hi achi aur kyi cheje bhut buri hai.... ye faisla hmara hi hai ki kaun si bate hmare aatma ke vikas ke liye jaruri hai.... aatmmanthan jaruri hai.....

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