बुधवार, अगस्त 18, 2010

क्यों नहीं बदला दिल..


एक दोस्त के दिल के ज़ज्बात..जो मेरे, शायद कहीं न कहीं हम सबके सच का अक्स हैं..। कभी खूबसूरती ऐसे छू जाती है कि हस्ती का एक टुकड़ा वक्त के कारवां के साथ बढ़ने से साफ मुकर जाता है..। सफ़र चलता रहता है, लेकिन वो अंश हमेशा के लिए वहीं खड़ा रह जाता है..।



आज भी वहीं खड़ी हूं
कई मोड़ गुजर गए हैं
रास्ते बदल गए हैं
मंजिले भी बदल गई
फिर भी वहीं खड़ी हूं
जब भी आते है यादों के झोंके
उसी मोड़ पर ले आते हैं वो झोंके
वहीं खड़ी फिर मुस्कराती हूं
जब याद तुम्हे करती हूं
फिर लगता है कि वही तो है सबकुछ
नहीं बदला है अभी कुछ
लेकिन फिर एक झोका आता है
गायब हो जाती है मेरे चेहरे से मुस्कान
फिर अहसास होता है
बदल गए हैं रास्ते
नए है मोड़, नई हैं मंजिले
और फिर आईने में नज़र आता है
बदल गई हूं मैं, गुजर गई है उम्र
लेकिन रह गई है एक शिकायत
जब बदल गया है सबकुछ, बदल गई है मंजिल
तो क्यों नहीं बदला फिर मेरा दिल

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